जग रचनाकार
हे रचनाकार ,
रचियता तुम्हीं रचना तुम ,
हर रचना की कल्पना तुम,
कूची तुम कैनवास तुम,
दृश्य का दृष्टिकोण तुम,
रूप तुम लावण्य तुम,
मधुर मोहक श्रृंगार तुम,
यक्ष्य तुम प्रत्यक्ष तुम,
साकार भी निराकार तुम,
मद्ध तुम मद्धोंमाद तुम,
संशय के परिष्कार तुम,
राग तुम वैराग्य तुम,
दीन के अवतार तुम,
अनुरोध के निदान तुम,
आश्रितों का तारण तुम,
हे अद्वितीय मेरे मन को,
भरमाने का प्रयास तुम,
मन भ्रमर का अंकूश भी तुम.........,
मैं तुम, ज्ञान तुम,
विवेक तुम, मान तुम,
अगम तुम सर्वसुलभ तुम,
आराध्यों का प्रस्ताव तुम,
षठ हम , असभ्य हम,
शिष्ठता का पर्याय तुम,
"देव तुम", 'याचक हम'
हर तृष्णा की तृप्ति तुम ......( by ) ~ प्रदीप यादव ~
Dard tera rahatein teri ,
ReplyDeletee khuda har marj ki dava teri,
kubul kar dua meri kaynat main bani rahe bandgee teri,farj par qurban hone ka jasba jaise Insan ko diya, maan ka saya bande ko diya, lahu se zasb surkhru Qatil ko muaaf karne ka Ilum diya . by pradeep