चाय से चाहत
By.... PRADEEP YADAV
चाय' मेरी तेरी चाहत है,
बिलकुल जैसे रिश्ते,
चाय पतीली की भाप से,
रंगीन ख्वाब दिखाती है,
फिर अपनी महक से
अरमान नए जगाती है,
प्यालियों की खनक से
चुस्कियों की आगोश तलक,
चाय मिलते रहने की
मुहलत दिलाती है,
चाय मर जाती है,
जब प्याली रीती रह जाती है,
पर अफ़सोस नाउम्मिदी का
जताकर फिर से जी जाती है,
सफल हो दिन आज तुम्हारा,
चुपके से कह जाती है ।... चाय तेरी मेरी चाहत है |
Contd.....

कितने दिनों से वो रहे कतराते ,
गिरह भी क्या खूब रही नजरो की,
इंतजार मैं झुकी थीं ,बही यादों मैं,फिर खो रही आँखों ही आँखों मैं,
गिरह भी क्या खूब रही नजरो की,
इंतजार मैं झुकी थीं ,बही यादों मैं,फिर खो रही आँखों ही आँखों मैं,
प्याली प्याली मौन ने,
आमंत्रित मुझे बना लिया ,
अनगिनत भूलों ने मेरी,
मुरीद उसका बना दिया ।
आमंत्रित मुझे बना लिया ,
अनगिनत भूलों ने मेरी,
मुरीद उसका बना दिया ।
थक कर आते हैं जब हम
चाय माशूका सी लगती है,
क्या हुआ कैसे गुजरा दिन ?
चुस्की दर चुस्की पूछती है,
चुस्की दर चुस्की पूछती है,
किस बात से है,खफा
किसने दिल ये नासाज़ किया,
किसने दिल ये नासाज़ किया,
हाल चाल पर बहलाती सी
चाय फिर ढाँढस दिलाती है,
चाय फिर ढाँढस दिलाती है,
मिलते रहा करो मुझसे कह,चाय चाहत बन जाती है । ... by ~ प्रदीप यादव ~ स्व-रचित
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