एक कसक सही नहीं जाती
दहशत के 2 0 वर्ष ......
मुंबई तत्कालीन बम्बई या बाम्बे ....
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अब भी ज़िंदा बची हैं ज़िंदगी तू आ और हमें मार जा,
क्यों रहा जीता मालिक तेरे जहां में नफरतों के बीच। ~ प्रदीप यादव ~
दहशत के 2 0 वर्ष ......
मुंबई तत्कालीन बम्बई या बाम्बे ....
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अब भी ज़िंदा बची हैं ज़िंदगी तू आ और हमें मार जा,
क्यों रहा जीता मालिक तेरे जहां में नफरतों के बीच। ~ प्रदीप यादव ~
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