रफ
हैं बड़े हुनरमंद आज भी आशिक ये तेरे इलाके में 'प्रदीप'।
ढोल के बजते ही, मेंहदी लगे हाथों का पता बतला देते हैं।। ~ प्रदीप यादव ~
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अब मिला हैं रोज़गार जो लबों पर सुर्खियाँ सजाने का,
सुनते हैं ये 'पान' भी बेकरार हैं लज्ज़तों के खजाने सा। . ~ प्रदीप यादव ~
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दौलत ऐ इल्मे नूर ज़रा लुटा तो दो जहाँ में।
रहे नहीं हसरत बाकी, तंगहाली भरे दौर में।।
कब तलक रहेंगी फर्माबदार भी ये आरज़ूएँ।
लश्कर जो बढ़ा ले चले हो हाजिर ऐ दौर में।।
देख रक्स को यूँ भर लीं आहें तमन्नाओं ने।
दबा सा पड़ा हे खजाना फनकारी के ठौर में ।।
इल्म ऐ नूर को ज़रा दूर तक फ़ैला दो यारों।
वाजिब यही है खयालात की तंगी के दौर में।।
BY~ प्रदीप यादव ~
>>>>>> .............. <<<<<<
फ़र्ज़ .... कर्तव्य, निर्वहन, ड्यूटी
इश्क ... प्रेम ,मोहोब्बत, उल्फत, लव
लाजमत .... आवश्यक, महत्ता, ज़रुरत, रीक्वायरमेंट, .
सुर्ख ..... लाल , यौवनपूर्ण,रक्ताभ, रेड़
फक्त ..... सिर्फ , केवल, ऑनली
ज़ज्बात ..... भाव, रस , इमोशंस
हैं बड़े हुनरमंद आज भी आशिक ये तेरे इलाके में 'प्रदीप'।
ढोल के बजते ही, मेंहदी लगे हाथों का पता बतला देते हैं।। ~ प्रदीप यादव ~
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अब मिला हैं रोज़गार जो लबों पर सुर्खियाँ सजाने का,
सुनते हैं ये 'पान' भी बेकरार हैं लज्ज़तों के खजाने सा। . ~ प्रदीप यादव ~
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दौलत ऐ इल्मे नूर ज़रा लुटा तो दो जहाँ में।
रहे नहीं हसरत बाकी, तंगहाली भरे दौर में।।
कब तलक रहेंगी फर्माबदार भी ये आरज़ूएँ।
लश्कर जो बढ़ा ले चले हो हाजिर ऐ दौर में।।
देख रक्स को यूँ भर लीं आहें तमन्नाओं ने।
दबा सा पड़ा हे खजाना फनकारी के ठौर में ।।
इल्म ऐ नूर को ज़रा दूर तक फ़ैला दो यारों।
वाजिब यही है खयालात की तंगी के दौर में।।
BY~ प्रदीप यादव ~
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फ़र्ज़ .... कर्तव्य, निर्वहन, ड्यूटी
इश्क ... प्रेम ,मोहोब्बत, उल्फत, लव
लाजमत .... आवश्यक, महत्ता, ज़रुरत, रीक्वायरमेंट, .
सुर्ख ..... लाल , यौवनपूर्ण,रक्ताभ, रेड़
फक्त ..... सिर्फ , केवल, ऑनली
ज़ज्बात ..... भाव, रस , इमोशंस
बेहद खूबसूरत..
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