मैं बेशकीमत हो चला हूँ .....
हो चला हूँ,
गिरफ्तार इश्क में,
लोग कहने लगे हैं,
आजकल
मैं बेशकीमत हो चला हूँ .....
तुम बेकार परेशाँ हो,
खर्चे मसरूफ रहने,
के उठाता हूँ।
यूँ तो ग़मगीन लोगों
के दर्द चुराता हूँ,
जब से मालूम हुआ
मोतियों से अनमोल
हैं ये उनके आँसू ....
मैं बेशकीमत हो चला हूँ .....
~ प्रदीप यादव ~
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