हाहाकार !!!
प्रदीप यादव की स्वरचित रचनाएँ...
Friday, 29 March 2013
रोशन-खयाली
इन पलकों में तुम हो जबसे बस गए,
मंजिलें
साफ देख लीं बाधाओं के पार।
~
प्रदीप यादव
~
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