शाम की मखमली बारात के आगाज़ पर आप
साहेबान दोस्तों का खैरमक्दम
बगावत ए इश्क
वादे पे नइयो जाना,
जाने जाना वादे ये
तोड़ने का दिल करता है,
खूबसूरत महबूब है तुझसा,
तोह इश्क ये बगावत सी
करने लगता है ।
~ प्रदीप यादव ~
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अँदाज़ थे मुझे भुलाने के,
"कुछ ऐसे भी".....
मुझे कर गए वोह ताकीद ख्वाबगाह में न आने की 'प्रदीप',
साहेबान दोस्तों का खैरमक्दम
बगावत ए इश्क
वादे पे नइयो जाना,
जाने जाना वादे ये
तोड़ने का दिल करता है,
खूबसूरत महबूब है तुझसा,
तोह इश्क ये बगावत सी
करने लगता है ।
~ प्रदीप यादव ~
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अँदाज़ थे मुझे भुलाने के,
"कुछ ऐसे भी".....
मुझे कर गए वोह ताकीद ख्वाबगाह में न आने की 'प्रदीप',
कब्रगाह महफूज करता रहा जो कयामत के इंतज़ार में। ~ प्रदीप यादव ~
और "कुछ ऐसे भी".....
मुझे ताकीद करते रहे थे,
जो ख्वाबों में ना आने की,
कोई जाकर उन्हें बतलाए ,
इंतजार ऐ कयामत की बातें
ज़माना रखता है महफूज़,
यहाँ कब्रगाह में भी लाशें। ~ प्रदीप यादव ~
और "कुछ ऐसे भी".....
मुझे ताकीद करते रहे थे,
जो ख्वाबों में ना आने की,
कोई जाकर उन्हें बतलाए ,
इंतजार ऐ कयामत की बातें
ज़माना रखता है महफूज़,
यहाँ कब्रगाह में भी लाशें। ~ प्रदीप यादव ~
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