बदलाव ...
दिल पूछता रहा तू
बदला कम कि मेरी ये
उम्मीदें जियादे है,
इतनी बार बदलने पर
भी कोई अपना सा
क्यूँ लगता रहता है, ~ प्रदीप यादव ~
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बंदगी
यूँ ना समझ लेना
कि फरामोश हो चला हूँ ।
कुछ और देर तलक,
बंदगी ए साहिब में लगा हूँ। ~ प्रदीप यादव ~
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