हाहाकार !!!
प्रदीप यादव की स्वरचित रचनाएँ...
Monday, 4 March 2013
धमाका ( the Heart Roar )
धमाका दिल का ....
तेरा काम है क्या? तू तो सिर्फ पम्प कर,
धमाका बड़ा क्यूँ मचा रहा है हडकंप कर,
मैंने छुपकर जो देखा लिया एक बार दिलबर,
बदनाम कर रहने लगा, मुआ दहाड़ मार कर।
~
प्रदीप यादव
~
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