रजा परवेज़ की जियारत ....
जियारत के नाम पर,
तिजारती कोई तोह मौला,
बढ रहा है तेरी बारगाह पे ,
मुझे पता हैं कि तु जानता है ,
तेरे हज्बे मामुल के लिए,
कदमबोसी सिर्फ पर्दादारी हे,
इबादतन तो तेरे दर पर बात
सूरत की नहीं,तंगखयाली की है।
________________
~ प्रदीप यादव ~
No comments:
Post a Comment