Thursday, 14 March 2013

जियारत


रजा परवेज़ की जियारत ....


जियारत के नाम पर,
तिजारती कोई तोह मौला,
बढ रहा है तेरी बारगाह पे ,
मुझे पता हैं कि तु जानता है ,
तेरे हज्बे मामुल के लिए,
कदमबोसी सिर्फ पर्दादारी हे,
इबादतन तो तेरे दर पर बात
सूरत की नहीं,तंगखयाली की है।
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   ~ प्रदीप यादव ~

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