Wednesday, 27 February 2013

Doubt A master trainer

Doubt A master trainer.....

Yes doubt is bit difficult to deal with,
once you become capable enough,
to test your doubt and trust the consequences,
you started being redeemer for that .....
so have a doubt clarification laboratory in you that
can show you how to trust, believe admire and
get inspired with ..... Enjoy friends its morning
By .....~ Pradeep Yadav ~


बेशक कुछ शक होते हैं हरदम ज़िंदगी में,
हसरतों से तोह कुछ एतबार से जीतते चलो ....। ~ प्रदीप यादव

Tuesday, 26 February 2013

मालामाल

   मालामाल ...

 शुभ प्रभात मित्रों , ...
चलो आज मालामाल हो लेते हैं ।
इन खुशियों की दौलतें बाँट लेते हैं,
भुला कर अहसास ऐ कमतरी,
इंसान होकर जी लेते हैं ।

जब आएगा तूफ़ान तो उसे भी,
थोड़ी सी जगह सीने में दे लेते हैं।
भीतर की करुणा उभार कर,
ऐश को फिक्र से समेट लेते हैं।

जाते जाते कूड़ेदान में,
अविश्वास और घिनोने इरादे फेंक लेते हैं।
शुभ प्रभात मित्रों ,....
चलो आज मालामाल हो लेते हैं ..... । ~  प्रदीप यादव ~

ही ही हिक्क ...... देखलो भाई लोग मैं ना कहता था ,
पीने वाले दुनिया को अलग नज़र से देखते हैं ....।
अब जाकर माने ना ...... good evening ....

Saturday, 23 February 2013

तबादला ऐ खयाल

   तबादला ऐ खयाल 
........

किसने खाई है यहाँ
कसम वफाओँ  की,
शब्द बेईमान हो चले हैं

रिश्तों में रहकर जहां,
लोग रिश्ते बदला करते हैं ,

लफ़्ज़ों के मायने खोकर,
यूँ मायूस से जिया करते हैं ,

हाँ ! बेशक बेवकूफियाँ ही,
करते हैं भावना में बहने वाले,
आजमाने का हौसला हो,
तो सारी बातें हैं लफ्फाज़ी।

चुनौतियाँ हों गंभीर तो भी,
सांसे ठंडी लिया करते हैं ।
क्यूँ हक्के इमान पर इतराने वाले
नाहक क़ानून जंगली चलवाते हैं ।  ~ प्रदीप यादव ~
  ......      ......      ........

हैदराबाद ब्लास्ट .....



हैदराबाद ब्लास्ट .....
झपट ले गया बाज एक मुर्गी को,
पर खाया नही की उसके खोह पर,
तिनके बिखरे थे घोसले के आस-पास,
दूर चित्कार रही थी मादा,
झिझोड कर बाज़ के चूजों को,
कोई और भूखा परबाज ले गया था।   ~ प्रदीप यादव ~

कुछ इसी तरह हो गई हे आज कल आतंक की परिभाषा .....

खलिश के माने



भीगे भीगे से हैं आज मन के कोने कोने,
जुल्मी बादलों को पता तुम बतला गए,
शीशे  के दरवाज़ों पर जा ठिठकी निगाहें,
कोरों में उभरी नमी लगी अक्स धुंधलाने ,
रख हाथ दिल पर सराहा जमाने में हमने,
वोह दिल की ही दुहाई देकर लगे पिघलाने।   ~ प्रदीप यादव


  खलिश  के माने   

 बूंदों को  नदीया का  , 

 नदीया को समंदर की 
 और समंदर भी जब  घुमडते बादलों की 
 चादर तान लेता है तो अपनी नमकीन सलाहियत के
 बावजूद ,
दो ' बूँद ' मीठे पानी को तरसता है ।

 जीवन चक्र का परिवर्तन ही तो   K H A L I S H का आधार बनता है              

 
निदान भी वही होता है । किसी कमी के होने का एहसास है खलिश ...

प्रदीप यादव ~

मेरी हालिया ग़ुरबत में तेरी मेहरबानियाँ भी बहुत हैं
तेरी परस्तिश मान भी लेता मगर तू खुदा तो नहीं हैं । ~ प्रदीप यादव ~

Friday, 22 February 2013

     वक़्ति नज़ीर    ....
दुनियावी लोग जब बातें करते थे, तो उन्होंने परेशान हाल लोगों के लिए ज़रूरतमंद, गमज़दा
या मज़लूम  जैसे खुद को बेहतर साबित करते अल्फाज़ से नवाजते हैं  .....
इसके उलट जब सामने खड़ा इंसा हाल ऐ बेहतरी के चलते रहम, हुनर और कुदरतन इल्म को
आइना बना  कर कौम के सामने नजीर या मिसाल कायम करता है  तो ज़माना बाअदब उन्हें
सलामी के तौर पर कह उठता है
... वाह जनाब या के मोहतरमा, "आपका ज़वाब नहीं । "
यहाँ एक बात पक्के तौर पर वाजे हैं कि जब आप कोई अहसास या किसी बात को कहें तोह उसे
ताना या उलाहना  की शक्ल  देकर किसी को मनाने वाली  मनुहार  करें या किसी अपने को दूर
करने का जतन ये पूरी तरह आपका ही  नज़रिया होता हैं,  और  ये वोह सब सलीके होते हैं, जब
आप लोगों के बीच भले ही मकबूलियत हासिल ना कर सकें, पर सुकून वाली जगह उनके दिलों में
पाने का सबब ज़रूर बन सकते हैं ।
~ प्रदीप यादव ~

Saturday, 16 February 2013

मजाहिया




वोह नमकीन रहा होगा दिलबर हमारा,
याद में जिनकी ये दिल होता रहा खारा। ~ प्रदीप यादव ~


चंद अशार सुनकर इरशाद कह दिया ,
मजाहिया को फिर सुखन कह लिया ।  ~  प्रदीप यादव  ~    

-01-2013 पर प्रकाशित
2nd Love...A Silent Love Story :)
Writer & Director: Chakresh Surya
... https://www.facebook.com/thechakreshsurya
... https://www.facebook.com/chakreshsuryafilms
Editor & Director of Photography: Viplove Jain (Vihaan Studios)
... https://www.facebook.com/ViploveJain.in
....https://www.facebook.com/vihaanstudios.in
Music Director & Background scoring: Vivek Rai
.... https://www.facebook.com/vivekraisatna
.... http://soundcloud.com/vivek-vivekrai-com

Associate Director: Varsha Bhatia
Assistant Director: Rishi Mishra
Assistant DOP: Ekta Hardia
Lights Arrangements: Aashita Seema Singh
Lights Co-ordinator: Aman Hasija
Our Great Supporters: Dewang Patel, Sumit Meena, Roshi Kasliwal,
Dr. Roshan Sharma, Pradeep Yadav, Naman Dudani, Rohit Gwaliya, Delicious Hut Indore and All the 2nd Love Associated friends.
Special Thanks to Shashank Sonawane and Yash Bargale (The Chai Bar Owners)

Thursday, 14 February 2013

हेलिकॉप्टर सौदा


    अगुस्ता वेस्टलेंड  हेलिकॉप्टर सौदा 
  



वोह ठहरा सियासतदां,पलट जाने का हुनरमंद,
किसे कोसते हम आप बगलगीर था जरूरतमंद ।  ~ प्रदीप यादव  ~


सौंपा किए मुस्तकबिल जिसे मसीहा समझकर ,
धंधेबाज़ निकला वो आबरू का सौदा करने वाला। ~  प्रदीप यादव  ~





Wednesday, 13 February 2013


भारतीय ज्ञानपीठ अवार्ड ( रिपोर्ट, प्रदीप यादव )
 अमिताभ बच्चन के आतिथ्य में उर्दु साहित्यकारिता पर "प्रोफेसर शहरयार "को 18 सितंबर 2011 को ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया | पूर्व में सर्वश्री कुर्तुलएन हैदर,फ़िराक गोरखपुरी और सरदार अली जाफरी को यह पुरस्कार प्रदान किया जा चुका हैं | प्रोफेसर शहरयार को ज्ञानपीठ से पूर्व बहादुर शाह ज़फर, उर्दु अकादमी पुरस्कार, राजभाषा और ग़ालिब पुरस्कार मिल चुके हैं | ज्ञानपीठ पुरस्कार अमिताभ बच्चन के हाथों से दिए जाने को ले साहित्य जगत में आलोचनाएं भी की गई | विद्वान उर्दु साहित्यकार मुन्नवर राणा जी भी उन में से एक रहे हैं ....|
भीष्म पितामह की भूमिका में आने वाले मुन्नवर राणा जी, उर्दु साहित्य को संवारने की तारीफ़े काबिल सेवा कर रहे हैं। इसमें दो राय नहीं कि बंटवारे ने एक मीठी भारतीय भाषा का साहित्य बेहद प्रभावित किया, परन्तु उर्दु अधिक न जानने वाले मेरे जैसे पाठकों की रूचि बढाने में टीवी और सिनेमाई उर्दु ने कारगर काम किया। अतः मेरी नज़र में तो प्रो.शहरयार साहब भी उर्दु साहित्य की सेवा करते राष्ट्र कवि की श्रेणी में ही विराजते हैं ....
आदरणीय श्री मुन्नवर राणा जी की उर्दु अदब की खिदमात के लिए कहूँगा ...
चाहतें लाख हों,
मगरुर ताक़तवर,
यूँ "मुन्नवर" सा खादिम
हो जाना आसां  नहीं ...   ~ प्रदीप यादव ~











कह लेने दो

कह लेने दो ....


बच्चा बच्चा कुदरत का नूर होता है
माँ बाप की आरजू का कसूर ढोता है,
क्या खूब फिर मेरे मुर्शिद ने फरमाया,
बच्चे से खुदा का राफ्ता ज़रूर होता हैं। ~ प्रदीप यादव ~
....         .....       .....
व्यस्तताओं के दौर हैं दोस्त भुला कर सलीका जीने का,
सिलसिले ढोते रहना ज़िदगी के इंतजाम की बस हद में हैं ..।  ~ प्रदीप यादव ~
....         .....       .....
दे भी गया अब तोह ,
खबर कोई हमसफर,
फिर क्यूं होता रहा ,
बेसबर यूँ आज ये,
खबरदार दिल ।  ~ प्रदीप यादव ~
....         .....       .....

कलि कलि के फूलने इंतज़ार न होगा अब जवां हुई रलियाँ,
दरियाफ्त थी दे लेता दाद कि तभी सिक्के ने रुख पलट लिया ..।  ~ प्रदीप यादव ~

Friday, 8 February 2013

इंतज़ाम

   इंतज़ाम    

घूमता फिर रहा था मैं
जिंदगी के आसपास
बस तुम मुझ पे ये,
एक अहसान करो ।
उड रही हैं शहर भर में ,
आवारागर्द तमन्नाएं
सपने उनके भी रंगने का
माकूल इंतज़ाम हो ...।

मालिक की दुआओं
से दिलों में ना
रही बाकी कोई खोट,
क्यूँ  फैलाकर फिर 
रंजिशों के मामले 
इलाके में दे रहे 
दिल बाँटने की चोट ।

प्रदीप यादव ~

मिज़ाज़ मौसमी
 ...
इस तरहा बरसी वोह
कि भीगता बदन,
कांपता रहा,
पसीने छोड़ता .... । ~प्रदीप यादव ~

Thursday, 7 February 2013

घाव

घाव 
ऐ काश काफिया,
जो मिला पाता,
ये तेरे मेरे सुरों का ,
दे लेते बधाई
हम भी ये दिल-
खोलकर,हुजुर  .....।

प्रीत की वो रीत,
गमों ने निभाई ,
काम ना आई ,
धागे की गुंथन भी ,
छुपा ना पाई
दाग घाव के,
सुई की ये सिलाई  ....।

वो कहता रहा,
रहो दूर,
खुनी खंज़र हूँ मैं,
फिर तडपाती,
क्यों रहती है,
उसकी जुदाई ...। 
~ प्रदीप यादव ~

Wednesday, 6 February 2013

नशा मुक्ति .......

नशा मुक्ति .......
पुरानी शराब महँगी और स्वाद की दृष्टि से बेहतरीन होती है,विनयार्ड में एक प्रथक कक्ष ( चेम्बर ) सधे हुए तापमान और एक विशेष सी परिस्थिति में रख कर वर्षों रंगत और फ्लेवर ( स्वाद - अर्क ) आने पर प्रयोग
हेतु बॉर या पैमानों में पहुंचती है |
क्या हुआ प्रदीप को ? क्यों शेअर की ये पोस्ट...?  पूछेंगे नहीं....हाँ ; कुछ को अच्छी भी लगती होगी, लेकिन क़ुछ तो दुष्प्रभाव की सोच कर पोस्ट को डिलीट भी मार देंगे या मेरी सोचऔर सिद्धान्तों से मेल नहीं खाती
तो फिर इसका, औचित्य हीक्या है ?

दोस्तों भारतीय घरों में जब स्त्री गर्भणि होती है, तो सेहतमंद शिशुओं और महान पुरुषों की फोटो दीवार पर सजाई जाती हैं.... इससे माता और गर्भस्थ शिशु के चित्त की तो शुद्धी होती ही हैं, साथ ही संस्कारवान शिशु
की प्राप्ति भी होती है। क्या किसी संस्कारवान शिशु ने अपने जन्म के उपरान्त से इन सभी विज्ञापनों को टी.
वी., फिल्म, मिडिया आदि पर नहीं देखा तो सिर्फ बड़े होने के बाद ही नशे की गिरफ्त में जाना, और तो और खुशियों को दारु में डूबाना, ग़मों को नशे से बहलाना  ...  तो किसी ने भी नही सिखाया होगा पर संस्कारों की दुहाई देते परिवारों को पियक्कड़ सदस्यों की वजह से जो फजीहतें झेलनी पड़ती हैं क्या कम संवेदनशील
नहीं हैं ? मित्रों अपने परिवारों में नशे की गिरफ्त में शामिल सदस्यों को उससे बाहर आने में मदद करें, वे भी ज़िदगी के साथ दो चार हो कर इनबोतलों या किसी अन्य तरह के नशों को त्याग घर परिवार औरसमाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का माद्दा जगा सकें ।
इतना सर खाने वाली पोस्ट के बाद .....तो सिर्फ शुभरात्री ही कहना बनता हैं ना ... सो शुभ रात्रि मित्रो ..।

~प्रदीप यादव ~

Tuesday, 5 February 2013

कुछ अर्ज़ किया है ....

कुछ अर्ज़ किया है ....
 नजर-उतराई ....

हसीं कातिलाना हो रहे ये हुस्न वाले,
छुपा कर निगाहों को चला करता हूँ ...।

उन्हें खबर हो गई जिन पर ये नज़र हैं,
हाशिये छोड़ कर ग़ज़ल लिखने लगा हूँ  ...।

 ~ प्रदीप यादव ~

आज का स्टेटस अपडेट 

में उन कागजों को राकेट कर आया,
लिखे जिन पर फसाने तेरे लिए कभी ...... ।
~ प्रदीप यादव  ~

आज का स्टेटस अपडेट

में उन कागजों को राकेट कर आया,
लिखे जिन पर फसाने तेरे लिए कभी ...... ।
~ प्रदीप यादव ~

पंजा लड़ाएगी

मैं बड़े ही प्रेम और विश्वास से प्रेयसी के पास गया
और पूछा " पंजा लड़ाएगी" ।
दारी ने जमाके चमाट धर दी भाई, मेरे   ....
वो दिन का दिन से मेरा तो 'प्रेम' से दिल उचट गया।
जो नारी पुरुष पे भारी पड़  जाए ना तो भैये हनुमान
जी की शरण में ही समझदारी से  .... समझे भाई जी  !!! ~ प्रदीप यादव ~ 
दरियाफ्त 

मंद पड़ रहे चमकीले नयन कैसे दिखलाऊँ ,
दरियाफ्त के इरादे किस तरह समझाऊँ ,
सचमुच ही हालात के द्वार पर
झंझावात से लड़ा हूँ ?
सुबकियां नहीं थी ना ही रुदन,
फैसलों की ठोकरों को सह रहा हूँ ?
ना पर्वों का उल्लास था,
न भटक जाने का अहसास था।
सूखा बादल था ठंडे मेह को तरसा हूँ।
खोलकर डब्बे को यादों को भरता हूँ।
महती आवश्यकता, निर्मूल समझता हूँ।
मंगल कामना करता हूँ ?
मैं जतन पहाड़ तोड़ने के करता हूँ ?
गिर गिर कर उठता रहा हूँ,
तब कंही जाकर पैरों पर खड़ा हूँ ?
अब नहीं छोडूंगा ज़िन्दगी का दामन,
प्रीत का वादा निभाने चला हूँ ?
रंग रीती को रंगरेज़ का पता,
बताने चल पडा हूँ।
जिद को डुबाने चल पडा हूँ।
राहों में फूलों की मुंडेर सजाने लग पडा हूँ ।
अधूरे मनमंदिर की मूरत को फिर गढ़ने लगा हूँ ?
फिर से एक बार निखर कर संवरने लगा हूँ।
 ..... ~ प्रदीप यादव ~





Monday, 4 February 2013



गैरत 
गमों के मारों,
तलाशो इन्हें,

दे लो संजीवनी।
बेजान सी रूहों,
के जानिब से,
लिखो नया इतिहास।
रोज़ी की चाहत
में,
नही
कब्र होना।
बदनसीबी अब से,
जान लेगी ,' गैरत '      
वाला रास्ता ।
~प्रदीप यादव ~

Sunday, 3 February 2013

प्रियम


      प्रियम      

छलछलाती, बलखाती नदी किनारे बैठ क्यों,
दुनिया के राज ठुकराने को मानस चाहता है।
खिलती धुप हरियाली का सिंगार लुभाता है,
 हूँ अकेली पर मेला सा चहूँओर भर जाता है।
बादलों के स्वतंत्र भाव सी अनुभूत भारहीनता ,
देह दरपती कमनीयता का बोध भरमाती है।
बनफूल प्रियम ने अलंकृत कर किया भेंट,
महुआपान पर तरंगित हो मति बहकती हैं।
बसंतोत्सव का पर्व मनाती धरा अनुपम,
विकार बेमेल अवांछनीय को बिसराती हैं।
फूले मोगरे सजे-धजे और कूकती कोकिला,
क्यारी क्यारी फुलवारी की गमकाती हैं ।
वासंती पलाश तले कुलांचते चौपाए के दल,
उपवन ने उन्मुक्त पुहुप पर नियती तय की है।

~
प्रदीप यादव ~

Saturday, 2 February 2013

हुनरबाज़ी

हुनरबाज़ी 

देख
रक्स को यूँ भर लीं,
आहें तमन्नाओं ने।
दबा सा पड़ा है खजाना,
फनकारी के ठौर में ।।
 

दौलत इल्मे नूर की,
ज़रा लुटा
तो दो जहाँ में।
रहे नहीं हसरत बाकी,
तंगहाली भरे दौर में।।


कब तलक
रहतीं, 
फरमाबदार भी ये आरजुएँ
लश्कर जो बढ़ा ले चले हो,
हाजिर ऐ  दौर में।।



~ प्रदीप यादव ~
  
   हुनरबाज़ी            ....   प्रतिभा, टेलेंट
   रक्स                   ....    नाटक, ड्रामा
   इल्म ऐ नूर         ....    ज्ञान का प्रकाश, लिट्रसि
   फर्माबदार          ....    आज्ञाकारिता, सहिष्णु, लॉयल
   आरजूएँ            ....     इच्छाएं, तमन्नाएँ, डिज़ायर्स 
   लश्कर             ....     यायावर, कारवां, काफिला, ईटीनेरेंट
   हाजिर ऐ दौर    ....    वर्तमान, तात्कालिक, प्रज़ेट टाईम