घाव
ऐ काश काफिया,
जो मिला पाता,
ये तेरे मेरे सुरों का ,
दे लेते बधाई
हम भी ये दिल-
खोलकर,हुजुर .....।
प्रीत की वो रीत,
गमों ने निभाई ,
काम ना आई ,
धागे की गुंथन भी ,
छुपा ना पाई
दाग घाव के,
सुई की ये सिलाई ....।
वो कहता रहा,
रहो दूर,
खुनी खंज़र हूँ मैं,
फिर तडपाती,
क्यों रहती है,
उसकी जुदाई ...।
~ प्रदीप यादव ~
ऐ काश काफिया,
जो मिला पाता,
ये तेरे मेरे सुरों का ,
दे लेते बधाई
हम भी ये दिल-
खोलकर,हुजुर .....।
प्रीत की वो रीत,
गमों ने निभाई ,
काम ना आई ,
धागे की गुंथन भी ,
छुपा ना पाई
दाग घाव के,
सुई की ये सिलाई ....।
वो कहता रहा,
रहो दूर,
खुनी खंज़र हूँ मैं,
फिर तडपाती,
क्यों रहती है,
उसकी जुदाई ...।
~ प्रदीप यादव ~
बहुत सुंदर..
ReplyDeleteRachnaa par sneh pradarshit karne kaa aabhaar .....
ReplyDeleteaa. Amritaa ji