Tuesday, 26 February 2013

मालामाल

   मालामाल ...

 शुभ प्रभात मित्रों , ...
चलो आज मालामाल हो लेते हैं ।
इन खुशियों की दौलतें बाँट लेते हैं,
भुला कर अहसास ऐ कमतरी,
इंसान होकर जी लेते हैं ।

जब आएगा तूफ़ान तो उसे भी,
थोड़ी सी जगह सीने में दे लेते हैं।
भीतर की करुणा उभार कर,
ऐश को फिक्र से समेट लेते हैं।

जाते जाते कूड़ेदान में,
अविश्वास और घिनोने इरादे फेंक लेते हैं।
शुभ प्रभात मित्रों ,....
चलो आज मालामाल हो लेते हैं ..... । ~  प्रदीप यादव ~

ही ही हिक्क ...... देखलो भाई लोग मैं ना कहता था ,
पीने वाले दुनिया को अलग नज़र से देखते हैं ....।
अब जाकर माने ना ...... good evening ....

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