हाहाकार !!!
प्रदीप यादव की स्वरचित रचनाएँ...
Saturday, 16 February 2013
मजाहिया
वोह नमकीन रहा होगा दिलबर हमारा,
याद में जिनकी ये दिल होता रहा खारा। ~
प्रदीप यादव
~
चंद अशार सुनकर इरशाद कह दिया ,
मजाहिया को फिर सुखन कह लिया । ~
प्रदीप यादव
~
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