Wednesday, 13 February 2013


भारतीय ज्ञानपीठ अवार्ड ( रिपोर्ट, प्रदीप यादव )
 अमिताभ बच्चन के आतिथ्य में उर्दु साहित्यकारिता पर "प्रोफेसर शहरयार "को 18 सितंबर 2011 को ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया | पूर्व में सर्वश्री कुर्तुलएन हैदर,फ़िराक गोरखपुरी और सरदार अली जाफरी को यह पुरस्कार प्रदान किया जा चुका हैं | प्रोफेसर शहरयार को ज्ञानपीठ से पूर्व बहादुर शाह ज़फर, उर्दु अकादमी पुरस्कार, राजभाषा और ग़ालिब पुरस्कार मिल चुके हैं | ज्ञानपीठ पुरस्कार अमिताभ बच्चन के हाथों से दिए जाने को ले साहित्य जगत में आलोचनाएं भी की गई | विद्वान उर्दु साहित्यकार मुन्नवर राणा जी भी उन में से एक रहे हैं ....|
भीष्म पितामह की भूमिका में आने वाले मुन्नवर राणा जी, उर्दु साहित्य को संवारने की तारीफ़े काबिल सेवा कर रहे हैं। इसमें दो राय नहीं कि बंटवारे ने एक मीठी भारतीय भाषा का साहित्य बेहद प्रभावित किया, परन्तु उर्दु अधिक न जानने वाले मेरे जैसे पाठकों की रूचि बढाने में टीवी और सिनेमाई उर्दु ने कारगर काम किया। अतः मेरी नज़र में तो प्रो.शहरयार साहब भी उर्दु साहित्य की सेवा करते राष्ट्र कवि की श्रेणी में ही विराजते हैं ....
आदरणीय श्री मुन्नवर राणा जी की उर्दु अदब की खिदमात के लिए कहूँगा ...
चाहतें लाख हों,
मगरुर ताक़तवर,
यूँ "मुन्नवर" सा खादिम
हो जाना आसां  नहीं ...   ~ प्रदीप यादव ~











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