Tuesday, 5 February 2013

कुछ अर्ज़ किया है ....

कुछ अर्ज़ किया है ....
 नजर-उतराई ....

हसीं कातिलाना हो रहे ये हुस्न वाले,
छुपा कर निगाहों को चला करता हूँ ...।

उन्हें खबर हो गई जिन पर ये नज़र हैं,
हाशिये छोड़ कर ग़ज़ल लिखने लगा हूँ  ...।

 ~ प्रदीप यादव ~

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