हाहाकार !!!
प्रदीप यादव की स्वरचित रचनाएँ...
Monday, 4 February 2013
गैरत
गमों के मारों,
तलाशो इन्हें,
दे लो संजीवनी।
बेजान सी रूहों,
के जानिब से,
लिखो नया इतिहास।
रोज़ी की चाहत
में
,
नही
कब्र होना।
बदनसीबी अब से,
जान लेगी ,' गैरत '
वाला रास्ता ।
~
प्
रदीप यादव
~
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