तबादला ऐ खयाल
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किसने खाई है यहाँ
कसम वफाओँ की,
शब्द बेईमान हो चले हैं
रिश्तों में रहकर जहां,
लोग रिश्ते बदला करते हैं ,
लफ़्ज़ों के मायने खोकर,
यूँ मायूस से जिया करते हैं ,
हाँ ! बेशक बेवकूफियाँ ही,
करते हैं भावना में बहने वाले,
आजमाने का हौसला हो,
तो सारी बातें हैं लफ्फाज़ी।
चुनौतियाँ हों गंभीर तो भी,
सांसे ठंडी लिया करते हैं ।
क्यूँ हक्के इमान पर इतराने वाले
नाहक क़ानून जंगली चलवाते हैं । ~ प्रदीप यादव ~
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किसने खाई है यहाँ
कसम वफाओँ की,
शब्द बेईमान हो चले हैं
रिश्तों में रहकर जहां,
लोग रिश्ते बदला करते हैं ,
लफ़्ज़ों के मायने खोकर,
यूँ मायूस से जिया करते हैं ,
हाँ ! बेशक बेवकूफियाँ ही,
करते हैं भावना में बहने वाले,
आजमाने का हौसला हो,
तो सारी बातें हैं लफ्फाज़ी।
चुनौतियाँ हों गंभीर तो भी,
सांसे ठंडी लिया करते हैं ।
क्यूँ हक्के इमान पर इतराने वाले
नाहक क़ानून जंगली चलवाते हैं । ~ प्रदीप यादव ~
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