इंतज़ाम
घूमता फिर रहा था मैं
जिंदगी के आसपास
बस तुम मुझ पे ये,
एक अहसान करो ।
उड रही हैं शहर भर में ,
आवारागर्द तमन्नाएं
सपने उनके भी रंगने का
माकूल इंतज़ाम हो ...।
मालिक की दुआओं
से दिलों में ना
रही बाकी कोई खोट,
क्यूँ फैलाकर फिर
रंजिशों के मामले
इलाके में दे रहे
दिल बाँटने की चोट ।
~ प्रदीप यादव ~
मिज़ाज़ मौसमी ...
इस तरहा बरसी वोह
कि भीगता बदन,
कांपता रहा,
पसीने छोड़ता .... । ~प्रदीप यादव ~
घूमता फिर रहा था मैं
जिंदगी के आसपास
बस तुम मुझ पे ये,
एक अहसान करो ।
उड रही हैं शहर भर में ,
आवारागर्द तमन्नाएं
सपने उनके भी रंगने का
माकूल इंतज़ाम हो ...।
मालिक की दुआओं
से दिलों में ना
रही बाकी कोई खोट,
क्यूँ फैलाकर फिर
रंजिशों के मामले
इलाके में दे रहे
दिल बाँटने की चोट ।
~ प्रदीप यादव ~
मिज़ाज़ मौसमी ...
इस तरहा बरसी वोह
कि भीगता बदन,
कांपता रहा,
पसीने छोड़ता .... । ~प्रदीप यादव ~
सब इसी इंतजाम में व्यस्त हैं..
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