हैदराबाद ब्लास्ट .....
झपट ले गया बाज एक मुर्गी को,
पर खाया नही की उसके खोह पर,
तिनके बिखरे थे घोसले के आस-पास,
दूर चित्कार रही थी मादा,
झिझोड कर बाज़ के चूजों को,
कोई और भूखा परबाज ले गया था। ~ प्रदीप यादव ~
कुछ इसी तरह हो गई हे आज कल आतंक की परिभाषा .....
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