हुनरबाज़ी
देख रक्स को यूँ भर लीं,
आहें तमन्नाओं ने।
दबा सा पड़ा है खजाना,
फनकारी के ठौर में ।।
दौलत इल्मे नूर की,
ज़रा लुटा तो दो जहाँ में।
रहे नहीं हसरत बाकी,
तंगहाली भरे दौर में।।
कब तलक रहतीं,
फरमाबदार भी ये आरजुएँ।
लश्कर जो बढ़ा ले चले हो,
हाजिर ऐ दौर में।।
~ प्रदीप यादव ~
हुनरबाज़ी .... प्रतिभा, टेलेंट
रक्स .... नाटक, ड्रामा
इल्म ऐ नूर .... ज्ञान का प्रकाश, लिट्रसि
फर्माबदार .... आज्ञाकारिता, सहिष्णु, लॉयल
आरजूएँ .... इच्छाएं, तमन्नाएँ, डिज़ायर्स
लश्कर .... यायावर, कारवां, काफिला, ईटीनेरेंट
हाजिर ऐ दौर .... वर्तमान, तात्कालिक, प्रज़ेट टाईम
देख रक्स को यूँ भर लीं,
आहें तमन्नाओं ने।
दबा सा पड़ा है खजाना,
फनकारी के ठौर में ।।
दौलत इल्मे नूर की,
ज़रा लुटा तो दो जहाँ में।
रहे नहीं हसरत बाकी,
तंगहाली भरे दौर में।।
कब तलक रहतीं,
फरमाबदार भी ये आरजुएँ।
लश्कर जो बढ़ा ले चले हो,
हाजिर ऐ दौर में।।
~ प्रदीप यादव ~
हुनरबाज़ी .... प्रतिभा, टेलेंट
रक्स .... नाटक, ड्रामा
इल्म ऐ नूर .... ज्ञान का प्रकाश, लिट्रसि
फर्माबदार .... आज्ञाकारिता, सहिष्णु, लॉयल
आरजूएँ .... इच्छाएं, तमन्नाएँ, डिज़ायर्स
लश्कर .... यायावर, कारवां, काफिला, ईटीनेरेंट
हाजिर ऐ दौर .... वर्तमान, तात्कालिक, प्रज़ेट टाईम
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