Wednesday, 6 February 2013

नशा मुक्ति .......

नशा मुक्ति .......
पुरानी शराब महँगी और स्वाद की दृष्टि से बेहतरीन होती है,विनयार्ड में एक प्रथक कक्ष ( चेम्बर ) सधे हुए तापमान और एक विशेष सी परिस्थिति में रख कर वर्षों रंगत और फ्लेवर ( स्वाद - अर्क ) आने पर प्रयोग
हेतु बॉर या पैमानों में पहुंचती है |
क्या हुआ प्रदीप को ? क्यों शेअर की ये पोस्ट...?  पूछेंगे नहीं....हाँ ; कुछ को अच्छी भी लगती होगी, लेकिन क़ुछ तो दुष्प्रभाव की सोच कर पोस्ट को डिलीट भी मार देंगे या मेरी सोचऔर सिद्धान्तों से मेल नहीं खाती
तो फिर इसका, औचित्य हीक्या है ?

दोस्तों भारतीय घरों में जब स्त्री गर्भणि होती है, तो सेहतमंद शिशुओं और महान पुरुषों की फोटो दीवार पर सजाई जाती हैं.... इससे माता और गर्भस्थ शिशु के चित्त की तो शुद्धी होती ही हैं, साथ ही संस्कारवान शिशु
की प्राप्ति भी होती है। क्या किसी संस्कारवान शिशु ने अपने जन्म के उपरान्त से इन सभी विज्ञापनों को टी.
वी., फिल्म, मिडिया आदि पर नहीं देखा तो सिर्फ बड़े होने के बाद ही नशे की गिरफ्त में जाना, और तो और खुशियों को दारु में डूबाना, ग़मों को नशे से बहलाना  ...  तो किसी ने भी नही सिखाया होगा पर संस्कारों की दुहाई देते परिवारों को पियक्कड़ सदस्यों की वजह से जो फजीहतें झेलनी पड़ती हैं क्या कम संवेदनशील
नहीं हैं ? मित्रों अपने परिवारों में नशे की गिरफ्त में शामिल सदस्यों को उससे बाहर आने में मदद करें, वे भी ज़िदगी के साथ दो चार हो कर इनबोतलों या किसी अन्य तरह के नशों को त्याग घर परिवार औरसमाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का माद्दा जगा सकें ।
इतना सर खाने वाली पोस्ट के बाद .....तो सिर्फ शुभरात्री ही कहना बनता हैं ना ... सो शुभ रात्रि मित्रो ..।

~प्रदीप यादव ~

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